Thursday, October 26, 2023

Izhaaar aur Intezaar

ईंट और पत्थर कहलाये हम, इमारत नहीं

सिर्फ ख़्वाबों में बसते हो तुम , हकीकत में नहीं 

तुम्हारी इक नज़र भी जन्नत है, हम भले तेरे लिए कुछ भी नहीं

तुम्हारे लिए सिर्फ दोस्ती का नाम है हम , हमारी तो है इबादत यही


होश कबके गवाएं है , नहीं खयाल क्या गलत और क्या सहीं

देने के लिए है सारी कायनात की दौलत, बस इज़हार नहीं 

बेइंतेहां मुहब्बत है तुमसे, सिर्फ कहने की इजाज़त नहीं

सिर्फ इक पल की इनायत काफी है, फिर सारी उम्र तेरी ज़रुरत भी नहीं

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